Rajesh Exports Share Price: SEBI ने लगाया ₹15 लाख करोड़ के रेवेन्यू हेरफेर का आरोप; लोअर सर्किट पर लॉक हुआ शेयर
भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में गुरुवार को एक बड़ा भूचाल आ गया जब दिग्गज जेम्स एंड ज्वैलरी कंपनी Rajesh Exports Share Price में भारी बिकवाली देखी गई। मार्केट रेगुलेटर SEBI (Securities and Exchange Board of India) द्वारा कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता (Rajesh Mehta) के खिलाफ एक कड़ा अंतरिम आदेश (Interim Order) जारी किए जाने के बाद निवेशकों में हड़कंप मच गया है। इस आदेश के तुरंत बाद Rajesh Exports Share Price में 5% का लोअर सर्किट लग गया और यह ₹104.65 के स्तर पर आ गया।
इस ब्लॉग में हम इस पूरे मामले का गहराई से विश्लेषण करेंगे कि आखिर क्यों इस बड़े मल्टीबैगर स्टॉक में इतनी बड़ी गिरावट आई है, SEBI के क्या आरोप हैं और कंपनी का इस पर क्या पक्ष है।
क्यों क्रैश हुआ Rajesh Exports Share Price? (मुख्य कारण)
गुरुवार, 4 जून 2026 को बाजार खुलते ही राजेश एक्सपोर्ट्स के शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव देखा गया। SEBI ने कंपनी पर अब तक के भारतीय कॉरपोरेट इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय हेरफेर (Financial Misrepresentation) का आरोप लगाया है। रेगुलेटर के अनुसार, कंपनी ने पिछले 5 वित्तीय वर्षों (FY21 से FY25) के दौरान अपने रेवेन्यू (Turnover) को लगभग ₹15.15 ट्रिलियन (₹15.15 लाख करोड़) तक बढ़ा-चढ़ाकर (Inflate) दिखाया है।
यह राशि कंपनी द्वारा रिपोर्ट किए गए कुल कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का लगभग 99.8% है। इस खबर के आते ही निवेशकों का भरोसा डगमगा गया और उन्होंने पैनिक सेलिंग (Panic Selling) शुरू कर दी, जिससे स्टॉक सीधे लोअर सर्किट पर लॉक हो गया।
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SEBI की जांच और प्रमोटर पर कड़ा एक्शन
सेबी के व्होल टाइम मेंबर कमलेश चंद्र वार्शने द्वारा जारी 109 पन्नों के इस अंतरिम आदेश में कई गंभीर चिंताएं जताई गई हैं:
- मार्केट से अस्थायी प्रतिबंध: सेबी ने कंपनी और उसके प्रमोटर राजेश मेहता को जांच पूरी होने तक सिक्योरिटीज मार्केट (शेयर बाजार) में भाग लेने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।
- विदेशी संस्थाओं के साथ संदिग्ध लेनदेन: रेगुलेटर ने पाया कि राजेश एक्सपोर्ट्स के कंसोलिडेटेड रेवेन्यू का 97% से 99% हिस्सा उसकी विदेशी सहायक कंपनियों (Subsidiaries) जैसे स्विट्जरलैंड स्थित ‘Valcambi SA’ से आता था, लेकिन इनके वास्तविक आर्थिक लेनदेन और बुक्स ऑफ अकाउंट्स में भारी मिसमैच मिला है।
- फंड डाइवर्जन का आरोप: सेबी ने यह भी आरोप लगाया कि बोर्ड या ऑडिट कमेटी की मंजूरी के बिना लगभग ₹339 करोड़ प्रमोटर के पर्सनल अकाउंट में ट्रांसफर किए गए, जिसका इस्तेमाल डेरिवेटिव ट्रेड्स के लिए किया गया।
- नॉन-जेनुइन ट्रांजैक्शंस: ‘Affluence Shares and Stocks’ नाम की एक इकाई के साथ बिना किसी वैध कॉन्ट्रैक्ट या इनवॉइस के ₹11,487 करोड़ से अधिक की फर्जी सेल और परचेज दिखाने का भी आरोप है।
कंपनी का वित्तीय प्रदर्शन: Q4FY26 के नतीजे (Financial Data Table)
एक तरफ जहां कंपनी पर रेवेन्यू बढ़ाने के आरोप हैं, वहीं दूसरी तरफ कंपनी ने मार्च 2026 को समाप्त तिमाही (Q4FY26) के नतीजे घोषित किए हैं, जो काफी चौंकाने वाले हैं। आइए टेबल के माध्यम से समझते हैं:
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Rajesh Exports Financial Performance Table
| वित्तीय संकेतक (Financial Metrics) | चौथी तिमाही (Q4FY26) | पिछली तिमाही (Q4FY25) | सालाना बदलाव (YoY Change) |
|---|---|---|---|
| ऑपरेशन्स से राजस्व (Revenue) | ₹2,36,864.21 करोड़ | ₹1,09,189.67 करोड़ | 116.9% की बढ़त |
| टैक्स से पहले नुकसान (Loss Before Tax) | ₹39.9 करोड़ (नुकसान) | ₹8.31 करोड़ (नुकसान) | नुकसान 380% बढ़ा |
| शुद्ध लाभ/हानि (Net Profit/Loss) | ₹53.46 करोड़ (नुकसान) | ₹1.96 करोड़ (मुनाफा) | मुनाफे से भारी नुकसान में |
Rajesh Exports Share Price Deep Data Analysis
ऊपर दिए गए आंकड़ों को देखने से साफ पता चलता है कि कंपनी का राजस्व (Revenue) कागजों पर तो सालाना आधार पर 116% से अधिक बढ़ा है, लेकिन उच्च खर्चों (Higher Expenses) के कारण कंपनी मुनाफे से सीधे घाटे में आ गई है। ₹2.36 लाख करोड़ से ज्यादा का रेवेन्यू कमाने वाली कंपनी का ₹53.46 करोड़ के नेट लॉस में जाना कॉरपोरेट गवर्नेंस और ऑपरेटिंग एफिशिएंसी पर बड़े सवाल खड़े करता है। यही कारण है कि Rajesh Exports Share Price इस वित्तीय प्रदर्शन के बाद और दबाव में आ गया है।
कंपनी और मैनेजमेंट का क्या है कहना?
इस पूरे विवाद पर राजेश एक्सपोर्ट्स और उनके प्रमोटर राजेश मेहता ने अपनी सफाई पेश की है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंजों को स्पष्टीकरण देते हुए कहा है:
“यह पूरा मामला सेबी और कंपनी के बीच कम्यूनिकेशन गैप (बातचीत की कमी) और कुछ कन्फ्यूजन (भ्रम) का नतीजा है। कंपनी द्वारा घोषित सभी रेवेन्यू आंकड़े पूरी तरह सही हैं और इसमें कोई ओवरस्टेटमेंट नहीं है।”
राजेश मेहता के अनुसार, सेबी ने उनकी स्विस सब्सिडियरी Valcambi के रेवेन्यू के बजाय केवल EBITDA को ध्यान में रख लिया, जिससे यह 97% का अंतर दिख रहा है। कंपनी ने कहा कि यह आदेश पूरी तरह अंतरिम (Interim) है और सेबी ने अभी तक कोई अंतिम प्रतिकूल निष्कर्ष नहीं निकाला है। कंपनी सेबी के सामने सभी प्रामाणिक दस्तावेज जमा करने की प्रक्रिया में है और उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही स्थिति साफ हो जाएगी।
Rajesh Exports Share Price का पास्ट रिटर्न और परफॉर्मेंस
पिछले कुछ समय से Rajesh Exports Share Price लगातार गिरावट के दौर से गुजर रहा है। पिछले एक हफ्ते में ही यह स्टॉक करीब 10% टूट चुका है। अगर इसके लॉन्ग टर्म परफॉर्मेंस को देखें, तो 22 दिसंबर 2025 को यह शेयर अपने 52-वीक हाई ₹239 पर था। वहां से लेकर अब तक (₹104.65) इसमें 54% से अधिक की भारी गिरावट आ चुकी है। इस बड़ी गिरावट के कारण छोटे और रिटेल निवेशकों की वेल्थ पूरी तरह स्वाहा हो गई है।
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Q1: Rajesh Exports Share Price में लोअर सर्किट क्यों लगा?
मार्केट रेगुलेटर SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके प्रमोटर पर ₹15.15 लाख करोड़ के रेवेन्यू को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने (Revenue Inflation) का आरोप लगाया है, जिसके बाद निवेशकों के डर से शेयर में 5% का लोअर सर्किट लग गया।
Q2: SEBI ने राजेश एक्सपोर्ट्स मामले में क्या अंतरिम कार्रवाई की है?
सेबी ने राजेश एक्सपोर्ट्स और उसके मुख्य प्रमोटर राजेश मेहता को अगले आदेश तक शेयर बाजार (Securities Market) में ट्रेडिंग या किसी भी प्रकार की भागीदारी करने से प्रतिबंधित कर दिया है।
Q3: क्या राजेश एक्सपोर्ट्स ने सेबी के आरोपों को स्वीकार किया है?
नहीं, राजेश एक्सपोर्ट्स ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह सेबी और कंपनी के बीच कम्यूनिकेशन गैप और कैलकुलेशन का भ्रम है। कंपनी के अनुसार उनके द्वारा घोषित रेवेन्यू पूरी तरह सही है।
Q4: Q4FY26 में राजेश एक्सपोर्ट्स का वित्तीय नतीजा कैसा रहा?
चौथी तिमाही (Q4FY26) में कंपनी का कंसोलिडेटेड रेवेन्यू बढ़कर ₹2,36,864.21 करोड़ रहा, लेकिन भारी खर्चों के कारण कंपनी को ₹53.46 करोड़ का शुद्ध घाटा (Net Loss) हुआ है।
Disclaimer:
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Written By : Stocks Path Finance Desk || Data Sources : NSE | BSE